भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई यानी मायानगरी . यहा पर हर रोज भारत के हर कोने से लाखों युवा रोजगार की चाहत लेकर आते है. और यही चाहत बनती है उनके आने वाले कल की सबसे बडी दुश्मन. मुंबई में पैसा कमाने के कई तरीके है कुछ सही तो कुछ गलत. कम समय में पैसा कमाने के चक्कर में कई लोग गलत काम करने लगते है. इन्ही गलत कामो में से एक है 'जीगोलो व्यापार'.
इस मायानगरी में जिगोलो व्यापार बोहोत पहले से है किंतू पिछले कुछ सालो से इसका विस्तार बडी तेजी से बढा है. यह व्यापार अब मुंबई तक सीमीत नही रहा. दिल्ली, कोलकाता, बेंगलोर समेत भारत के हर बडे शहर में इसका जाल फैल गया है.
शायद आप में से कई लोग 'जिगोलो' इस नाम से अभीतक वाकीफ नही होंगे. आखीर ये जीगोलो है क्या चीज ? यही सवाल आपके जेहेन में अभी आ रहा होगा. तो चलिये बताते है इसकी पूरी कहानी. जिगोलो व्यापार को सीधी भाषा में पुरुष देहव्यापार कहा जाता है. जी हा बिलकुल सही सुना आपने पुरुष देहव्यापार ये आज बडी तेजी से बढ रहा है. क्या है ये जिगोलो? चलिये आज जानते है इसका पूरा सच. इस व्यापार में मुख्य रुप से पुरुष एक रात के लीये अपना जिस्म कुछ पैसो केलीये बेचते है. और आप यकीन नही करेंगे इन्हे एक रात के लीये जो खरीदती है वो और कोई नही बल्की बडे घर की या हाई प्रोफाईल महिलाये होती है. मुंबई की इस चमक धमक भरी जिंदगी में कई महिलाये शारीरिक सुख प्राप्त नही कर पाती. वो चाहे वैवाहिक जीवन में परेशानी, अकेलापन, अपने पार्टनर में कमी या फिर कभी कभी बस थ्रील केलीये ये महिलाये इन जिगोलो कहे जाने वाले अनजान पुरुषो को एक रात केली ये अपना हमसफर बना लेती है. जीगोलो यानी पुरुष देहव्यापार में काम करने वाले पुरुष ओर कोई नही बल्की हर उम्र के दुर दराज से नौकरी की चाह में मुंबई आने वाले युवा होतें है.
जिगोलो को उस महिलाके साथ एक रात बिताने के ५००० से लेकर ५०००० हजार रुपय मिलते है. हम आपको बतायेंगे की आखिर इसमे कोई व्यक्ती कैसे फस जाता है. कई कॉल सेंटर इस जीगोलो व्यापार के साथ जुडे हुये है. यह कॉल सेंटर से किसी अनजान व्यक्ती को कॉल आता है यह आपको इस व्यापार के बारे में बडी रंगीन बाते बताते है और ऐसे बात करते है की कोई भी लडका इसे करने केलीये राजी हो जाये. लेकीन इसमे क्या खतरे हो सकते है ये किसी को नही बताया जाता. इस व्यापार में सबसे बडा खतरा HIVऔर AIDS होने का है.
HIVऔर AIDS होने से किसी युवा लडके की जिंदगी बर्बाद हो जाती है. पिछले कुछ सालो में यही कारण है जिसके वजह से कई पुरुष HIV और AIDS के शिकार बने. आपको बता दे की कई युवा सिर्फ पैसो की चाह में इस दलदल में घुसते है और धीरे धीरे इसमे और धसते जाते है. फिर क्या जब होश आता है तब यकीन होता है की हम ऐसी दलदल में इस कदर फस चुके है जहासे बाहर निकलने का कोई रास्ता है ही नही और सब तेहस नेहस हो चुका है.
आखिर क्या हुआ हे हमारे समाज को ? कीस दिशा में जा रही है हमारी युवा पिढी ? क्यों पनप रहा है ये जीगोलो व्यापार? ऐसे कई सवाल लेकीन जवाब एक भी नही ! और यदि आपको भी इस जीगोलो व्यापार में आने का न्योता कोई देता है तो सावधान हो जाइये क्योंकी हर पिली दिखनेवाली चीज सोना नही होती.



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